सिरसा नगर परिषद् में इनेलो का गढ़ ढहा

पहले स्थान पर सत्ताधारी भाजपा (15 सीट), दुसरे पर हलोपा (6 सीट), तीसरे पर कांग्रेस (5 सीट), 3 निर्दलीय तथा केवल 2 सीट के साथ इनेलो आखरी स्थान पर रही ।

सिरसा नगर परिषद, तोशाम और छछरोली की गाम पंचायतों व पंचों की 268 रिक्त सीटों, छह सरपंचों और ब्लाक समिति सदस्य की एक सीट पर चुनाव रविवार को छिटपुट घटना को छोड़ शांतिपूर्ण संपन्न हो गए । सिरसा के 31 वार्डों में 68 फीसदी मतदान हुआ । मतदान के तुरंत बाद हुई मतगणना के नतीजे आने के साथ ही भाजपाइयों में खुशी की लहर दौड़ गई । सिरसा में नप में पहली बार इनेलो के किले को ध्वस्त कर भाजपा बहुमत के करीब पहुंची। यहाँ पार्टी ने सिबल पर चुनाव लड़ा था,जबकि अन्य पार्टियां बगैर सिंबल के चुनाव मैदान में उतरी। भाजपा ने 15 बाडों में जीत हासिल की, वहीं 5 वार्डों में कांग्रेस, छह में हलोपा, दो में इनेलो समर्थक व तीन निर्दलीय प्रत्याशी जीते। नगर परिषद बोर्ड में इनेलो का एकछत्र राज रहा है, लेकिन इस बार दो सीटो पर ही सिमटकर रही गई।

Source : Amar Ujala

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क्या भाजपा के आगे घुटने टेक चुकी है इनेलो?

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File photo

हाल ही में हरियाणा की 2 राज्य सभा सीटों के लिए चुनाव होने है। ऐसे में हरियाणा की सियासत पूरी तरह गरमा चुकी है। पहली सीट पर चौ० बीरेंदर सिंह का चुना जाना लगभग तय है।  लेकिन दूसरी सीट पर भाजपा उम्मीदवार के चुनाव के लिए, भाजपा को कांग्रेस या इनेलो के समर्थन की जरुरत पड़ेगी।
कांग्रेस का भाजपा को समर्थन देना नामुमकिन है। ऐसे में भाजपा के पास एक ही विकल्प बचता है और वो है हरियाणा का प्रमुख विपक्षी दल इनेलो।
भाजपा उम्मीदवार के चुने जाने लिए या तो इनेलो विधायक वोटिंग के दौरान वाकआउट करें या सीधे सीधे भाजपा उम्मीदवार का समर्थन कर दें। ऐसे में भाजपा को दूसरी राज्य सभा की सीट भी मिल जाएगी।
पर बड़ा सवाल ये है कि क्या इनेलो ऐसा करेगी?
अज्ञात सूत्रों की माने तो परदे के पीछे भाजपा और इनेलो में सांठगांठ हो चुकी है। और दोनों पार्टी कोई ऐसा विकल्प तलाश रही है जिससे दोनों पार्टियों को जनता को अपनी सांठगांठ की सफाई ना देनी पड़े।

अगर ऐसा होता है तो भाजपा को कोई नुक्सान नहीं है लेकिन इनेलो की प्रमुख विपक्षी दल वाली साख पर दाग लग जाएगा । कुछ लोगों का तो ये भी कहना है इनेलो भाजपा के उम्मीदवार को समर्थन देने के बदले कुछ व्यक्तिगत मुद्दों पर अपनी सांठगांठ में लगी हुई है। इसलिए इनेलो ने भूपेंदर सिंह हुड्डा के उस प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया जिसमे उन्होंने इनेलो द्वारा चुने गए किसी भी न्यूट्रल उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कही थी।

विधायक दल की स्थिति के अनुसार राज्यसभा की दूसरी सीट भाजपा के खाते में तभी आएगी जब भाजपा को इनेलो का सीधे सधे या गुपचुप समर्थन मिले। अभी तक दूसरी सीट पर जिन उम्मीदवारवारों के नाम सामने आए उससे साफ़ तौर पर जाहिर होता है कि उनके कहीं ने कहीं इनेलो नेता अभय चौटाला से सम्बद्ध हैं।

अगर भाजपा दूसरा राज्यसभा सांसद भी अपनी पसंद से चुनवाने में कामयाब होती है तो क्या यह कहना सही नहीं होगा कि इनेलो कहीं न कहीं भाजपा के आगे घुटने टेक चुकी है?

अपनी राय हमें आप कमेंट में लिख कर पर भेज सकते हैं । चुनी हुई राय हम यहाँ प्रकाशित करेंगे ।

MPLAD Usage – दीपेंदर न०1 सांसद, दुष्यंत चौटाला सबसे पीछे

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MPLAD fund, यानी सांसद क्षेत्र विकास निधि, को क्षेत्र एवं जनता के विकास पर इस्तेमाल करने में दीपेंदर हुड्डा हरियाणा के न०1 सांसद उभर के आये है, वहीँ दूसरी ओर हिसार से इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला आखरी यानी 10वें स्थान पर रहे है. ट्रिब्यून द्वारा जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार दीपेंदर हुड्डा ने पिछले दो वर्षों में अपने संसदीय क्षेत्र में 7.5 crore से भी अधिक रूपये विकास कार्यों पर खर्च किये है. आपको याद दिला दें, दीपेंदर हरियाणा से कांग्रेस के एक मात्र सांसद है. ऐसे में विकास कार्यों को महत्व देना उनकी तथा उनकी पार्टी की विकास रुपी सोच को दर्शाता है.

दूसरी ओर दुष्यंत चौटाला का आवंटित निधि का केवल 23 प्रतिशत ही इस्तेमाल करना उनकी विकास रुपी सोच पर सवालिया निशान खडा करता है. केंद्र तथा प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद भाजपा का कोई भी सांसद 63% इस्तेमाल के आंकड़े को पार नहीं कर पाया. बयानबाजी ओर भाषण एक तरफ लेकिन अंत में आंकड़ों तथा विकास पर ही जनता फैसला करती है. आगे जो भी हो फिलहाल जनता ओर क्षेत्र के विकास कराने के मामले में दीपेंदर हुड्डा अपने प्रतिद्वंदियों से कहीं आगे निकल चुके है.
Data Source : The Tribune

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“बदले की भावना से काम कर रही खट्टर सरकार। इनेलो मुख्य विपक्षी दल नहीं बल्कि सरकार का मुख्य सहयोगी दल”

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पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि मौजूदा सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है। द्वेष भावना से उन पर एक के बाद एक मामले दर्ज किए जा रहे हैं, लेकिन ऐसे कामों से उनकी आवाज दबाई नहीं जा सकती। हुड्डा ने कहा कि अगर भाजपा सरकार अनियमितताओं की ही जांच कराना चाहती है तो जनसंदेश अखबार और देवीलाल ट्रस्ट को दी गई जमीनों की भी जांच कराए। इन्हें ये जमीनें किस रेट पर दी गई और उस समय बाजार भाव क्या था। उन जमीनों पर अब क्या एक्टिविटी हो रही है और किस उद्देश्य के लिए दी गई थी।
हुड्‌डा ने कहा कि इनेलो मुख्य विपक्षी दल नहीं, बल्कि मुख्य सहयोगी दल की भूमिका अदा कर रहा है। नेशनल हेराल्ड का मामला पहले भी उठ चुका है। लेकिन सरकार ने विपक्ष के नेता के पत्र पर कार्रवाई की है। हो सकता है इस पत्र को तेजाखेड़ा से आने में 1 साल का समय लग गया हो। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जस्टिस धींगरा कमीशन को छोड़कर उन्हें अभी तक किसी अन्य जांच एजेंसी से कोई नोटिस या पत्र नहीं मिला है।
हुड्डा ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में कुछ गलत नहीं हुआ है। पूरी बात तो वे रिकॉर्ड देखकर ही बता पाएंगे, लेकिन इतना जरूर है कि कंपनी को ब्याज समेत पूरा पैसा लेकर ही प्लॉट दिया गया था। हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) ऑटोनोमस बॉडी है और उसे रिज्यूम प्लॉट बहाल करने के पूरे अधिकार थे। यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि पहले भी ऐसा होता रहा है।