भूपेंद्र हुड्डा के जन्मदिन पर समर्थकों ने ट्विटर पर किया हैशटैग ट्रेंड। पहले स्थान पर रहा #HpyBirdayBShooda 


15 सितम्बर, 1947 को जन्मे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौ० भूपेंद्र सिंह हुड्डा का जन्मदिन हमेशा की तरह उनके समर्थकों द्वारा धूम धाम से मनाया जाता रहा हैl उनके दिल्ली निवास पर सुबह से ही बधाई देने के लिए समर्थकों का तांता लग जाता हैl जोकि रात 11 बजे तक चलता रहता हैl जाहिर हरियाणा में वर्तमान राजनीति में हुड्डा बड़ा कद रखते हैl ना केवल वे हरियाणा कांग्रेस के सबसे ऊँचे कद के नेता बल्कि हरियाणा के सभी दल के नेताओं में भी उंचा कद रखते हैl 
आज उनके जन्म दिवस उनके समर्थकों ने अनूठे ढंग से उन्हें बधाई दीl सुबह 7 बजे से hashtag #HpyBirdayBSHooda ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा और केवल एक घंटे के अन्दर ये ट्विटर पर पहले स्थान पर पहुँच गयाl 

 इस ट्रेंड की पहुँच लगभग ढाई लाख लोगों तक की थी जो कि अपने आप में काफी बड़ी संख्या हैl इससे इस बात का भी पता चलता है कि हुड्डा समर्थकों की पक्कड़ सोशल मीडिया पर काफी अच्छी हैl गौर करने वाली बात ये है कि बधाई देने वालों में समर्थक ना केवल हरियाणा से बल्कि सभी प्रदेशों से थेl अप्रवासिय भारतीय भी उनको बधाई देने में पीछे नहीं थे।

कुछ ट्वीट्स

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“मोदी जी तीन-चार चुने हुए उद्योगपतियों के लिये काम कर रहे है : राहुल गांधी”


लखनऊ : कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी में गुटबाजी के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए आज कार्यकर्ताओं से अपनी ताकत को पहचानने का आह्वान किया और संदेश दिया कि जमीन पर रहकर जनता के बीच रहने वाले कार्यकर्ताओं को ही पार्टी में आगे बढ़ाया जाएगा.

राहुल ने ‘यूपी उद्घोष’ कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं के सवालों के जवाब देते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सिर्फ कुछ गिने-चुने उद्योगपतियों के लिये काम करने का आरोप लगाते हुए उस पर तल्ख हमले किये. ‘मिशन-2017′ के लिए कांग्रेस की नयी टीम के गठन के बाद पहली बार लखनऊ आये राहुल ने प्रदेश संगठन में गुटबाजी के सवाल पर स्पष्ट संदेश देते हुए कहा ‘‘उत्तर प्रदेश को पहले नंबर पर लाना हमारा लक्ष्य है. हमारा जो रास्ता और दिशा है उसे लेकर कांग्रेस के अंदर आमराय है. अगर कोई उसके खिलाफ काम करेगा, चाहे वह कितना ही बडा हो, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी.’ 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव को एक योजना बनाकर लडेगी. उसमें हर नेता को कोई ना कोई जिम्मेदारी दी जाएगी। नेता को जमीन पर उतरकर महीने में 20-25 दिन लडना पडेगा। जो लोग जमीन पर और जनता के बीच दिखाई देंगे। वे लोग जिनके जूते फटेंगे, जिनका कुर्ता गीला होगा, वे ही कांग्रेस को आगे बढाएंगे.

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री 78 वर्षीय शीला दीक्षित को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के औचित्य के सवाल पर राहुल ने कहा कि सोच आयु से ज्यादा जरुरी चीज होती है. शीला में व्यापक अनुभव है, उन्होंने दिल्ली में तीन बार राज किया और उसे बदल दिया.

उन्होंने कहा कि दिल्ली में लोग अपनी गलती पर पछता रहे हैं. वे कहते हैं कि पहले काम होता था, अब सिर्फ ड्रामा और बयानबाजी होती है. विधायक जेल जाते हैं. आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सीधा मुकाबला किस पार्टी से होगा, इस सवाल पर राहुल ने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि अगर कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं की आवाज पर चली तो आगामी विधानसभा चुनाव में उसके सामने कोई खडा नहीं हो सकेगा.

उन्होंने कहा ‘‘मैं चाहता हूं कि हमारे कार्यकर्ता कों जमीनी नेताओं को जगह दी जाए और हम अपनी विचारधारा और नीतियों पर लड़ें. पार्टी की विचारधारा हर जाति, हर धर्म और हर सोच के व्यक्ति को जगह देने की है. विधानसभा में किसी एक का एकाधिकार ना चले और गरीब से गरीब की आवाज ऊपर तक पहुंचे.’ लोकसभा में कल ‘अरहर मोदी’ के अपने तंज का जिक्र करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा ‘‘मोदी जी तीन-चार चुने हुए उद्योगपतियों के लिये काम कर रहे हैं. 

उन्होंने पहले आपकी जमीन छीनने की कोशिश की अब आपकी थाली से दाल छीनने की कोशिश कर रहे हैं. हम किसानों के भले के लिये और महंगाई के खिलाफ आंदोलन करेंगे और मोदी जी को समझाएंगे कि देश की गरीब जनता आपको झूठे वादों को नहीं मानती.’ प्रधानमंत्री मोदी के बुलेट ट्रेन चलाने के वादे पर तंज करते हुए राहुल ने कहा ‘‘मोदी जी बुलेट ट्रेन चलाने की बात कर रहे हैं. देश का रेल बजट एक लाख 40 हजार करोड का है. एक बुलेट ट्रेन का दाम एक लाख करोड है. मतलब मोदी जी एक बुलेट ट्रेन पर पूरा रेल बजट खर्च करना चाहते हैं. सवाल यह भी है कि बुलेट ट्रेन में बैठेगा कौन. उसमें बैठने का दाम प्रतिव्यक्ति 10-15 हजार से कम नहीं होगा.

क्या भाजपा के आगे घुटने टेक चुकी है इनेलो?

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File photo

हाल ही में हरियाणा की 2 राज्य सभा सीटों के लिए चुनाव होने है। ऐसे में हरियाणा की सियासत पूरी तरह गरमा चुकी है। पहली सीट पर चौ० बीरेंदर सिंह का चुना जाना लगभग तय है।  लेकिन दूसरी सीट पर भाजपा उम्मीदवार के चुनाव के लिए, भाजपा को कांग्रेस या इनेलो के समर्थन की जरुरत पड़ेगी।
कांग्रेस का भाजपा को समर्थन देना नामुमकिन है। ऐसे में भाजपा के पास एक ही विकल्प बचता है और वो है हरियाणा का प्रमुख विपक्षी दल इनेलो।
भाजपा उम्मीदवार के चुने जाने लिए या तो इनेलो विधायक वोटिंग के दौरान वाकआउट करें या सीधे सीधे भाजपा उम्मीदवार का समर्थन कर दें। ऐसे में भाजपा को दूसरी राज्य सभा की सीट भी मिल जाएगी।
पर बड़ा सवाल ये है कि क्या इनेलो ऐसा करेगी?
अज्ञात सूत्रों की माने तो परदे के पीछे भाजपा और इनेलो में सांठगांठ हो चुकी है। और दोनों पार्टी कोई ऐसा विकल्प तलाश रही है जिससे दोनों पार्टियों को जनता को अपनी सांठगांठ की सफाई ना देनी पड़े।

अगर ऐसा होता है तो भाजपा को कोई नुक्सान नहीं है लेकिन इनेलो की प्रमुख विपक्षी दल वाली साख पर दाग लग जाएगा । कुछ लोगों का तो ये भी कहना है इनेलो भाजपा के उम्मीदवार को समर्थन देने के बदले कुछ व्यक्तिगत मुद्दों पर अपनी सांठगांठ में लगी हुई है। इसलिए इनेलो ने भूपेंदर सिंह हुड्डा के उस प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया जिसमे उन्होंने इनेलो द्वारा चुने गए किसी भी न्यूट्रल उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कही थी।

विधायक दल की स्थिति के अनुसार राज्यसभा की दूसरी सीट भाजपा के खाते में तभी आएगी जब भाजपा को इनेलो का सीधे सधे या गुपचुप समर्थन मिले। अभी तक दूसरी सीट पर जिन उम्मीदवारवारों के नाम सामने आए उससे साफ़ तौर पर जाहिर होता है कि उनके कहीं ने कहीं इनेलो नेता अभय चौटाला से सम्बद्ध हैं।

अगर भाजपा दूसरा राज्यसभा सांसद भी अपनी पसंद से चुनवाने में कामयाब होती है तो क्या यह कहना सही नहीं होगा कि इनेलो कहीं न कहीं भाजपा के आगे घुटने टेक चुकी है?

अपनी राय हमें आप कमेंट में लिख कर पर भेज सकते हैं । चुनी हुई राय हम यहाँ प्रकाशित करेंगे ।

हुड्डा होंगे राहुल की टीम का हिस्सा, बन सकते है महासचिव

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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता चौ० भूपेंद्र सिंह हुड्डा को जल्द ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी में उच्च पद मिलने की बातें जोर पकड़ चुकी है। सूत्रों की माने तो राहुल गांधी की ताज पोशी के साथ साथ हुड्डा को महासचिव पद की जिम्मेदारी सौपी जा सकती है। उन्हें राहुल के मुख्य सलाहकारों में शामिल किया जा सकता है।
हाल ही में संपन्न हुए 5 राज्यों में चुनावों में केवल एक ही राज्य में कांग्रेस की सरकार बन पाई और दो राज्य असम तथा केरल में सत्ता से हाथ धोना पड़ा। ऐसे में कांग्रेस में बड़े फेरबदल होने ही बातें ज़ोर पकड़ने लगी है।
आपको बता दें हुड्डा न केवल हरियाणा बल्कि पडोसी राज्यों में भी अच्छी पैठ रखते है। और अन्य दलों के काफी नेता उनके नेतृत्व में कांग्रेस में आने को तैयार भी है। हाल ही में हुड्डा से 36 का आंकड़ा रखने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने भी रोहतक में एक ब्यान में कहा है कि वे हुड्डा से सभी गिले शिकवे दूर करने को तैयार है। शायद इसके पीछे एक बड़ा कारण हाईकमान का हुड्डा की नेतृत्व क्षमता में विश्वास और राहुल के साथ उनकी बढ़ती नज़दीकी हो सकती है।

इनेलो करेगी भाजपा का समर्थन?

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हरियाणा से 2 राज्य सभा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री, चौ० बीरेंदर सिंह तथा सुरेश प्रभु का कार्यकाल समाप्त होने को है। ऐसे में इन 2 सीटों पर चुनाव कुछ ही दिनों में होगा।
विधायकों की की बात करें तो एक सीट पर तो भाजपा बहुत ही आसानी से जीत जाएगी लेकिन दूसरी राज्यसभा सांसद की सीट पर उससे जीतने के लिए इनेलो या कांग्रेस के समर्थन की जरुरत पड़ेगी।
जहाँ तक कांग्रेस का सवाल है, उसका भाजपा को समर्थन देना नामुमकिन है। ऐसे में सारी आँखें हरियाणा के प्रमुख विपक्षी दाल इनेलो पर टिक जाती है।
देखा जाए तो 3 समीकरण बन सकते है :
(1) इनेलो भाजपा के उम्मीदवार का समर्थन करे।
(2) इनेलो और कांग्रेस मिलकर किसी तीसरे तथा न्यूट्रल उम्मीदवार को राज्यसभा में पहुंचा दे।
(3) वोटिंग के दौरान इनेलो वाकआउट कर भाजपा के उम्मीदवार की जीत आसान बना दे।

चूँकि इनेलो हरियाणा का प्रमुख विपक्षी दल है, ऐसे में उसका भाजपा को समर्थन करना प्रदेश की जनता को निराश तथा इनेलो के वर्करों को अचंभित कर सकता है।
एक अफवाह ये भी है कि इसी सन्दर्भ में कुछ दिन पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और अभय चौटाला की मुलाकात भी हुई थी।

अगर इनेलो सीधा या वाकआउट करके भाजपा के उम्मीदवार का समर्थन करती है तो इसमें भाजपा को शार्ट टर्म फायदा तो है पर लंबे समय में नुक्सान भी। और 12 साल से विपक्ष में  बैठी इनेलो को शार्ट टर्म में थोडा और लॉन्ग टर्म बहुत ही अधिक नुक्सान उठाना पड़ सकता है तथा साथ ही समर्थकों में रोष भी पैदा कर सकता है।

क्या इनेलो directly या indirectly भाजपा का समर्थन करेगी? इसकी तस्वीर बहुत जल्द जनता के सामने आ जाएगी

हुड्डा की अगुवाई में बड़ी संख्या में अन्य दलों के नेता कांग्रेस में आने को तैयार

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फाइल फोटो

हरियाणा में गरमाए राजनैतिक माहौल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। समझा जा रहा है कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष को प्रदेश के ताजा राजनीतिक हालात से अवगत कराया।

ऐसा समझा जाता है कि हुड्डा की अगुवाई में बड़ी संख्या में अन्य दलों के नेता कांग्रेस में आने को तैयार हैं। गौर करने वाली बात ये है कि जो भी नेता कांग्रेस में आना चाह रहे है उनकी पहली पसंद प्रदेश अध्यक्ष तंवर न होकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा है और उन्हें केवल हुड्डा का नेतृत्व ही मंजूर है. प्रदेश अध्यक्ष से उनके छत्तीस के आंकड़े को देखते हुए हाईकमान की अनुमति जरूरी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि हुड्डा ने इस संबंध में भी सोनिया गांधी से बातचीत की।

पिछले दिनों कांग्रेस में शामिल होने वाले इनेलो के 2 पूर्व विधायक (जिनमें 1 मौजूदा जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं) के पार्टी में शामिल होने को तंवर ने अवैद्य बताया, बाद में पता चला कि हुड्डा ने इसको पहले ही भांप कर हाइकमान से इजाज़त ले ली थी।

हुड्डा के करीबी सूत्रों ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष होने के नाते सोनिया गांधी से हुड्डा अक्सर मिलते रहते हैं। बताया जा रहा है कि मुलाकात में पूर्व मुख्यमंत्री ने हाल ही में इनेलो के दो पूर्व विधायकों के कांग्रेस में आने पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर के ऐतराज का मामला भी उठाया जो दोनों खेमों के बीच नई मोर्चाबंदी की वजह बनता दिख रहा है। सूत्र कहते हैं कि सोनिया ने हुड्डा को भरोसा जताया है कि वह इस मुद्दे पर उनके साथ हैं और जल्द ही इस तरह होने वाली परेशानी का इलाज करेंगी।

MPLAD Usage – दीपेंदर न०1 सांसद, दुष्यंत चौटाला सबसे पीछे

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MPLAD fund, यानी सांसद क्षेत्र विकास निधि, को क्षेत्र एवं जनता के विकास पर इस्तेमाल करने में दीपेंदर हुड्डा हरियाणा के न०1 सांसद उभर के आये है, वहीँ दूसरी ओर हिसार से इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला आखरी यानी 10वें स्थान पर रहे है. ट्रिब्यून द्वारा जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार दीपेंदर हुड्डा ने पिछले दो वर्षों में अपने संसदीय क्षेत्र में 7.5 crore से भी अधिक रूपये विकास कार्यों पर खर्च किये है. आपको याद दिला दें, दीपेंदर हरियाणा से कांग्रेस के एक मात्र सांसद है. ऐसे में विकास कार्यों को महत्व देना उनकी तथा उनकी पार्टी की विकास रुपी सोच को दर्शाता है.

दूसरी ओर दुष्यंत चौटाला का आवंटित निधि का केवल 23 प्रतिशत ही इस्तेमाल करना उनकी विकास रुपी सोच पर सवालिया निशान खडा करता है. केंद्र तथा प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद भाजपा का कोई भी सांसद 63% इस्तेमाल के आंकड़े को पार नहीं कर पाया. बयानबाजी ओर भाषण एक तरफ लेकिन अंत में आंकड़ों तथा विकास पर ही जनता फैसला करती है. आगे जो भी हो फिलहाल जनता ओर क्षेत्र के विकास कराने के मामले में दीपेंदर हुड्डा अपने प्रतिद्वंदियों से कहीं आगे निकल चुके है.
Data Source : The Tribune

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